
सीधी जिले में एक गरीब बैगा परिवार की बिटिया अपनी पढ़ाई की गुहार लेकर खड़ी थी, लेकिन सिस्टम के दरवाज़े बंद थे। पुलिसकर्मी मिलने नहीं दे रहे थे, अधिकारी चुप थे और राजनीति अपनी सीमाओं में सिमटी नजर आ रही थी।
तभी सीधी के कई पत्रकारों ने सवाल उठाया, कैमरा उठाया और सच्चाई को जनता के सामने रखा। वीडियो वायरल हुआ तो सत्ता के गलियारों में हलचल मच गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले का संज्ञान लिया और राजनीति से ऊपर उठकर मानवता का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री ने बैगा परिवार की बिटिया अनामिका की शिक्षा, कोचिंग और भविष्य को लेकर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बिटिया अनामिका एक दिन विख्यात चिकित्सक बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेगी।
यह घटनाक्रम बताता है कि जब पत्रकारिता सवाल करती है, जनता साथ खड़ी होती है और सरकार संवेदना दिखाती है, तब लोकतंत्र ज़िंदा नजर आता है।
यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं था, यह एक मानवीय निर्णय था।
आज सवाल भी जरूरी है और संवेदना भी।
और जब दोनों साथ चलें,
तभी बदलाव होता है।
