
“जिला ब्यूरो चीफ सीधी विनय कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट”
सीधी | विशेष रिपोर्ट, मध्य प्रदेश के सीधी जिले से बिजली विभाग की मनमानी और भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ शिकायत करना ही उपभोक्ता के लिए “गुनाह” बन गया। आरोप है कि 181 सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने के बाद उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन ही काट दिया गया, जबकि उसके खाते में 48 रुपये एडवांस जमा हैं और कोई बकाया भी नहीं है।
शिवसेना पदाधिकारी प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके घर का बिजली कनेक्शन (नंबर: N1355002161), जो उनके बाबा जी के नाम से ग्राम बंजारी, उत्तर टोला, थाना जमोड़ी, जिला सीधी में है, पिछले 3 दिनों से काट दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि बिजली बिल पूरी तरह जमा है, बल्कि 48 रुपये अतिरिक्त भी जमा हैं, फिर भी अंधेरे में रहने को मजबूर किया जा रहा है।
“हफ्ते बसूली का पैसा दो, विद्युत संबंधी 181 कटवाओ, तभी जलेगी लाइट” – खुला खेल रिश्वत का,
प्रदीप विश्वकर्मा ने बिजली विभाग पर सीधा आरोप लगाया है कि यहाँ बिना “सुविधा शुल्क” के कोई काम नहीं होता। लाइनमैन संतोष पनिका पर आरोप है कि वह घर-घर जाकर पैसे वसूलता है, लेकिन वह राशि विभाग में जमा नहीं करता।
स्थानीय लोगों के अनुसार:
जिनसे पैसा लिया जाता है, उनके घरों में बिजली लगातार जलती रहती है
और जिनका बिल पूरी तरह जमा है, उनकी बिजली बिना कारण काट दी जाती है,
यानी नियम नहीं, बल्कि “रिश्वत” तय करती है कि किसके घर उजाला रहेगा और किसके घर अंधेरा।आखिर भर्राशाही व्यवस्था क्यों,
हर महीने ‘खर्चा’ की मांग, नहीं देने पर धमकी,
आरोप और भी गंभीर हैं। बताया गया कि लाइनमैन द्वारा हर महीने “खर्चा” मांगा जाता है। यदि कोई उपभोक्ता यह अवैध रकम देने से मना करता है, तो उसका कनेक्शन काटने की धमकी दी जाती है — और कई मामलों में इसे अंजाम भी दिया जा रहा है।
अधिकारियों की मिलीभगत? जेई के बयान ने बढ़ाए सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जेई पंकज पांडेय द्वारा कथित रूप से कहा गया कि अगर पहले बता देते तो “बड़े साहब” से बात करने की जरूरत कहा थी। वहीं लाइनमैन खुलेआम कहता है कि “सुविधा शुल्क जमा करो और लाभ पाओ”, और यह भी कि “ऊपर तक सबका हिस्सा जाता है, हर हफ्ते हिसाब देना पड़ता है।”
अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक कर्मचारी की मनमानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
181 शिकायत बनी सजा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब सरकारी शिकायत तंत्र का उपयोग करना भी आम जनता के लिए खतरा बन गया है?
क्या 181 में शिकायत करने की “सजा” कनेक्शन काटकर दी जाएगी,
प्रशासन से मांग,
पीड़ित और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
तुरंत बिजली कनेक्शन बहाल किया जाए,
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो,
दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए,
अवैध वसूली के इस खेल को तुरंत बंद कराया जाए,
वही प्रदीप विश्वकर्मा ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो शिवसेना जिला इकाई सीधी पूरे गांव एवं जिले के परेशान बिजली उपभोक्ताओं को साथ लेकर विरोध का रास्ता अपनाएगी और आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।उसका जिम्मेदारी सिर्फ ऐसे कर्मचारी और अधिकारी की होगी।
निष्कर्ष,
सीधी जिले का यह मामला सिर्फ एक उपभोक्ता की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो “सुविधा शुल्क” का यह खेल आम जनता का हक छीनता रहेगा और अंधेरा सिर्फ घरों में ही नहीं, व्यवस्था में भी फैलता जाएगा।
