
“जब नेता बना सहारा” — सीधी में सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने जनसुनवाई में लोगों के दर्द को दिया अपना कंधा,,
सीधी की मिट्टी आज एक अलग ही संवेदना की गवाह बनी, जब सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने अपने निवास पर जनसुनवाई करते हुए सिर्फ समस्याएं नहीं सुनीं—बल्कि लोगों के दर्द को महसूस भी किया।
दूर-दराज़ गांवों से आए बुजुर्ग, और युवा जब अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे, तो माहौल सिर्फ औपचारिक नहीं रहा—बल्कि पूरी तरह भावनात्मक हो गया। किसी की आंखों में उम्मीद थी, तो किसी के चेहरे पर सालों की परेशानी का बोझ साफ झलक रहा था।
सांसद ने हर व्यक्ति को धैर्यपूर्वक सुना, कई लोगों को पास बैठाकर उनकी समस्याएं विस्तार से समझीं। कुछ मामलों में तुरंत अधिकारियों को फोन लगाकर समाधान के निर्देश दिए, तो कुछ मामलों में मौके पर ही कार्रवाई शुरू करवा दी।
एक बुजुर्ग की आंखें नम हो गईं जब उन्होंने कहा— “आज पहली बार लगा कि कोई हमारा अपना भी है जो हमारी सुनता है…”
यही अपनापन इस जनसुनवाई की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
यह सिर्फ समस्याओं का निराकरण नहीं था, बल्कि एक ऐसा पल था जहां जनता और जनप्रतिनिधि के बीच का रिश्ता और गहरा हुआ। लोग संतुष्ट होकर लौटे, उनके चेहरे पर राहत और दिल में विश्वास साफ नजर आया।
कई-गांव में इस पहल की चर्चा है—लोग कह रहे हैं कि जब नेता खुद आगे बढ़कर सुनते हैं, तो उम्मीदें भी जिंदा हो जाती हैं।
