
“सीधी से अरविंद द्विवेदी की रिपोर्ट”
सीधी | कुचवाही | कुबरी, भारतीय जनता पार्टी, जो कभी अपने जमीनी कार्यकर्ताओं के दम पर सत्ता के शिखर तक पहुँची, आज उन्हीं कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ करने के आरोपों में घिरती दिख रही है।
UGC बिल के विरोध में सीधी जिले के अमरपुर मंडल अंतर्गत कुबरी से भाजपा को बड़ा झटका लगा है।
एक के बाद एक दो कद्दावर नेताओं—पूर्व बूथ अध्यक्ष उमेश कुमार शुक्ला और पूर्व मंडल मंत्री जीवेंद्र कुमार शुक्ला ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से बगावती अंदाज़ में इस्तीफा दे दिया है।
यह सिर्फ इस्तीफा नहीं, बल्कि भाजपा की जमीनी राजनीति पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
“जब भाजपा को पहचान नहीं थी, तब हम थे”
पूर्व बूथ अध्यक्ष उमेश शुक्ला ने अपने इस्तीफे में बेहद तीखे शब्दों में पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा—
“जब भाजपा को झंडा उठाने वाला कोई नहीं था, तब हम जैसे कार्यकर्ता गाँव-गाँव घूमे, भूखे-प्यासे रहे, गालियाँ खाईं। आज जब सत्ता मिल गई, तो वही पार्टी हमें बोझ समझने लगी है।”
उनका कहना है कि भाजपा अब कार्यकर्ताओं की पार्टी नहीं, बल्कि सिर्फ सत्ता की पार्टी बनकर रह गई है।
UGC बिल: शिक्षा सुधार या सामाजिक हमला?
उमेश शुक्ला और जीवेंद्र शुक्ला—दोनों नेताओं का आरोप है कि UGC बिल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि समाज को मानसिक रूप से तोड़ने वाला कानून है।
उमेश शुक्ला ने कहा—
“UGC बिल हमारे बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला है। यह कानून मानसिक गुलामी पैदा करेगा। इससे मेरी सामाजिक और मानसिक क्षति हुई है।”
इसी आक्रोश में उन्होंने अपने इस्तीफे पर साफ शब्दों में लिखा,
#UGCBlackBill
“सत्ता में बैठे सवर्ण चेहरे पूरी तरह मौन”
सबसे विस्फोटक बयान में उमेश शुक्ला ने भाजपा के अपने ही बड़े नेताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया।
उन्होंने कहा—
“पार्टी के सवर्ण विधायक, सांसद और यहां तक कि विंध्य क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला तक इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश हैं। इससे साफ है कि अब भाजपा को सवर्ण समाज की ज़रूरत नहीं रही।”
यह बयान भाजपा के भीतर अंदरूनी असंतोष को उजागर करता है।
“विचारधारा खत्म, अब सिर्फ सत्ता” — जीवेंद्र शुक्ला
पूर्व मंडल मंत्री जीवेंद्र कुमार शुक्ला ने भी पार्टी से नाता तोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा—
“हमने पार्टी को ज़ीरो से हीरो बनाने में जान झोंक दी। गाँव-गाँव, पगडंडियों में चलकर संगठन खड़ा किया। लेकिन आज भाजपा UGC बिल के जरिए सवर्ण समाज के साथ घोर अन्याय कर रही है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि,
“यह वही भाजपा नहीं रही जिसके लिए हमने संघर्ष किया था। अब विचारधारा नहीं, सिर्फ सत्ता बचाने की राजनीति हो रही है।”
स्पष्ट ऐलान—अब कोई पार्टी कार्य नहीं,
उमेश शुक्ला ने अपने इस्तीफे में साफ लिखा—
“आज के बाद मैं पार्टी का कोई भी कार्य नहीं करूंगा।”
यह पंक्ति भाजपा संगठन के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है, क्योंकि यह असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है।
भाजपा के लिए चेतावनी या आने वाले विस्फोट का संकेत?
एक पूर्व बूथ अध्यक्ष और एक पूर्व मंडल मंत्री का इस तरह सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ना बताता है कि—
नाराज़गी सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं,
संगठन के अंदर भी आग सुलग रही है,
जमीनी कार्यकर्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं,
अब सबसे बड़ा सवाल यही है,
क्या भाजपा नेतृत्व समय रहते इस आक्रोश को समझेगा?
या फिर ऐसे इस्तीफे आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विस्फोट बनेंगे?
