
सीधी। भारतीय जनता पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं में शामिल कुबरी बूथ के पूर्व अध्यक्ष उमेश कुमार शुक्ला ने UGC बिल को लेकर गहरी नाराज़गी जताते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा भाजपा मंडल अमरपुर, जिला सीधी को संबोधित पत्र के माध्यम से दिया गया।
उमेश शुक्ला ने अपने इस्तीफे में साफ शब्दों में लिखा है कि वे पूर्व में कुबरी बूथ अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में सक्रिय प्राथमिक सदस्य थे, लेकिन भाजपा सरकार द्वारा लाया गया UGC कानून उनकी सामाजिक और मानसिक स्थिति को आहत करने वाला है। इसी कारण वे आज से पार्टी के किसी भी कार्य में स्वयं को असमर्थ मानते हैं।
“जब झंडा उठाने वाला कोई नहीं था, तब हम थे”
इस्तीफे के बाद दिए गए बयान में उमेश शुक्ला ने तीखा हमला बोलते हुए कहा—
“जब भाजपा का झंडा पकड़ने वाला कोई नहीं था, तब हम जैसे कार्यकर्ताओं ने खुलकर पार्टी को खड़ा किया। आज जब पार्टी ने केंद्र तक सरकार बना ली है, तो अब उसका असली चेहरा सामने आ रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि UGC बिल के जरिए बच्चों की मानसिक स्थिति को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सवर्ण नेताओं की चुप्पी पर सवाल,
उमेश शुक्ला ने पार्टी के भीतर की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि—
“पार्टी के सवर्ण विधायक, सांसद और विंध्य क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला तक इस गंभीर मुद्दे पर मौन हैं। इससे लगता है कि अब भाजपा को सवर्ण समाज की जरूरत नहीं रही।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब ऐसी विचारधारा को बढ़ावा दे रही है, जो समाज को तोड़ने वाली है।
“मन व्यथित है, अब कोई कार्य नहीं”
अपने बयान के अंत में शुक्ला ने कहा कि“इस पूरे घटनाक्रम से मन अत्यंत व्यथित है। अब आगे से पार्टी का कोई भी कार्य नहीं कर सकेंगे।”
इस्तीफे में उन्होंने #UGCBlackBill का उल्लेख करते हुए अपने विरोध को सार्वजनिक रूप से दर्ज कराया है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
एक जमीनी कार्यकर्ता और पूर्व बूथ अध्यक्ष का इस तरह खुलकर विरोध में आना भाजपा के लिए संकेतात्मक चेतावनी माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व और जनप्रतिनिधि इस नाराज़गी को गंभीरता से लेंगे या ऐसे ही पुराने सिपाही एक-एक कर किनारे होते जाएंगे?
