
सीधी जिले में अवैध रेत खनन को लेकर सियासत तेज हो गई है। शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे ने इस मुद्दे पर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पांडे ने कहा कि यदि सरकार युवाओं को रोजगार देने में सक्षम नहीं है, तो रेत खनन को केवल “अपराध” के रूप में देखना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिले में बढ़ती बेरोजगारी ही युवाओं को अवैध गतिविधियों की ओर धकेल रही है।
“मजबूरी में अपराध की राह पकड़ रहे युवा”
सोन नदी का उदाहरण देते हुए पांडे ने कहा कि यदि वहां खुलेआम अवैध रेत खनन हो रहा है, तो यह प्रशासनिक विफलता के साथ-साथ रोजगार संकट का भी प्रमाण है।
उन्होंने कहा, “जब युवाओं के पास कोई विकल्प नहीं बचता, तो वे मजबूरी में ऐसे कामों में शामिल हो जाते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सीधी जिले के कई युवा बेरोजगारी के कारण तेजी से पैसा कमाने के चक्कर में गांजा, कोरेक्स, शराब तस्करी, चोरी और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त हो रहे हैं। जिसका जिला जेल पड़रा की स्थिति इसका उदाहरण है, जहां बड़ी संख्या में युवा सिर्फ बेरोज़गारी और नशे में में पड़ कर जेल में कैद हैं।
सीधी में सबसे ज्यादा पलायन की मार, खाली हो रहा अपना जिला,,
जिले में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण लोग अन्य शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
पांडे ने कहा कि सरकार के रोजगार और विकास के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
“घड़ियाल क्षेत्र में सख्ती, बाकी जगह नियंत्रित खनन हो”
पांडे ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में घड़ियाल जैसे संरक्षित वन्यजीव मौजूद हैं, वहां खनन पर सख्ती से प्रतिबंध जारी रहना चाहिए।
हालांकि अन्य क्षेत्रों में नियंत्रित और वैध रेत खनन की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके और अवैध गतिविधियों पर रोक लग सके।
“स्थानीय को नहीं मिल रहा लाभ, जिले सहित प्रदेश से बाहर जा रही रेत”
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले से बड़े पैमाने पर रेत अन्य राज्यों में भेजी जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को इसका कोई खास लाभ नहीं मिल रहा।
पांडे ने मांग की कि खदानों को जल्द स्वीकृति दी जाए और जिले में रेत सस्ती की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
“बेरोजगारों की फौज बनेगी बड़ी समस्या”
चेतावनी देते हुए पांडे ने कहा कि अगर रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो आने वाले समय में जिले में बेरोजगारों की “बड़ी फौज” खड़ी हो जाएगी, जो सामाजिक असंतुलन और अपराध को और बढ़ा सकती है।
सीधी सांसद ने भी उठाई थी नियंत्रित खनन की बात,, लेकिन कार्यवाही अभी धरातल पर नहीं उतरी,
इस मामले में सीधी के सांसद डॉक्टर राजेश मिश्रा ने बोले थे कि घड़ियाल वाले क्षेत्रों में खनन पर प्रतिबंध जरूरी है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में नियंत्रित खनन की अनुमति दिलाने और स्थानीय लोगों को लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सीधी जिले में रेत खनन का मुद्दा अब केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बेरोजगारी, पलायन और बढ़ते अपराध से जुड़ा गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।
