
परसिली पंचायत में आरोपों का तूफान: राशन पर्ची से नाम काटने से लेकर आवास योजना में कथित पैसे मांगने तक गंभीर सवाल
सीधी/मझौली। ग्राम पंचायत परसिली में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पंचायत के मूल निवासी अंकित कुमार शर्मा, पिता स्वर्गीय चंद्रिका प्रसाद शर्मा ने पंचायत स्तर पर कथित अनियमितता और प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए CM हेल्पलाइन 181 का दरवाजा खटखटाया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं, शिकायत में ₹5,000 की राशि मांगने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
PM आवास के नाम पर ₹5 हजार मांगने का आरोप
शिकायत में ग्राम पंचायत की सरपंच सुशीता सिंह बघेल एवं रोजगार सहायक सचिव अरुणाचल द्विवेदी पर कथित रूप से राशि मांगने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर जल्द निराकरण कराने की मांग की है।
यह आरोप यदि जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल सीधे तौर पर गरीब हितग्राहियों के लिए बनाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता और पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली पर खड़े होते हैं।
CM हेल्पलाइन 181 में दर्ज हुई शिकायत
मामले में 25 अगस्त 2026 को CM हेल्पलाइन 181 पर शिकायत क्रमांक 40234830 दर्ज कराई गई है। शिकायत फिलहाल निराकरण के लिए संबंधित L1 अधिकारी के पास बताई जा रही है।
अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
एक शिकायत नहीं, आरोपों की पूरी फेहरिस्त
अंकित कुमार शर्मा का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है और इसके पीछे चुनावी रंजिश कारण बताई जा रही है। उनका दावा है कि सरपंच के चुनाव के बाद उनका नाम राशन पर्ची से कटवा दिया गया, जबकि उनके परिवार के पास आज भी पक्का मकान नहीं है।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में अन्य लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला, लेकिन उनका गरीब परिवार इस योजना से वंचित है।
राशन पर्ची से नाम काटने का आरोप, अब आवास योजना पर सवाल
अंकित शर्मा का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले चुनावी रंजिश के चलते उनका नाम राशन पर्ची से हटवा दिया गया था। उनका दावा है कि यह कथित कार्रवाई किसी प्रशासनिक आवश्यकता के कारण नहीं बल्कि व्यक्तिगत रंजिश के चलते की गई।
यदि ऐसा हुआ है तो जांच का सवाल यह है कि राशन पर्ची से नाम हटाने की प्रक्रिया किसके आदेश पर हुई और उसके पीछे वास्तविक कारण क्या था?
पूर्व में झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने पंचायत सचिव विनोद गुप्ता और सरपंच पति राजेंद्र सिंह बघेल पर पूर्व में उनके खिलाफ कथित रूप से झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाने का भी आरोप लगाया है।
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि शिकायतकर्ता के खिलाफ पूर्व में कोई रिपोर्ट दर्ज हुई थी तो उसका आधार क्या था और क्या उस मामले में कोई कार्रवाई या जांच हुई?
सबसे बड़ा सवाल—गरीब हितग्राही तक कब पहुंचेगा उसका हक?
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी पात्र व्यक्ति से योजना का लाभ दिलाने के नाम पर राशि मांगे जाने का आरोप सामने आता है, तो इसकी निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच जरूरी हो जाती है।
सवाल यह भी है—
क्या ₹5 हजार की कथित मांग की जांच होगी? क्या शिकायतकर्ता वास्तव में PM आवास योजना की पात्रता पूरी करता है? राशन पर्ची से नाम किस आधार पर हटाया गया? क्या चुनावी रंजिश के आरोपों में कोई सच्चाई है? और यदि आरोप सही पाए गए तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
अब प्रशासन की परीक्षा
मामला CM हेल्पलाइन तक पहुंच चुका है। ऐसे में महज कागजी निराकरण के बजाय मौके की जांच, पात्रता सूची, आवास योजना के दस्तावेज, राशन पर्ची से नाम हटाने का रिकॉर्ड और कथित राशि मांगने के आरोप की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
गरीब के हक की योजना में यदि भ्रष्टाचार या दबाव की शिकायत सही है तो कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति भी साफ होनी चाहिए।
पक्ष रखना संबंधितों का अधिकार
इस खबर में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावों और CM हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरपंच सुशीता सिंह बघेल, रोजगार सहायक सचिव अरुणाचल द्विवेदी, सरपंच पति राजेंद्र सिंह बघेल एवं पंचायत सचिव विनोद गुप्ता का पक्ष सामने आने पर उसे भी निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
अब सवाल सिर्फ एक शिकायत का नहीं—सवाल यह है कि क्या गरीब हितग्राही को उसका हक मिलेगा या फिर सरकारी योजना की चौखट पर कथित लेन-देन और स्थानीय रंजिश के आरोपों का साया बना रहेगा?
