
बद्री प्रसाद तिवारी सेवानिवृत्त (शिक्षक)* के छोटे भाई समाजसेवी प्रभाकर तिवारी ‘पप्पू तिवारी’ का निधन, पटेहरा खुर्द में शोक की लहर; अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग,
अचानक ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे प्रभाकर तिवारी ने भोपाल के चिरायु मेडिकल अस्पताल में ली अंतिम सांस, 26 अक्टूबर को हुआ था ऑपरेशन; 3 नवंबर को उपचार के दौरान हुआ देहावसान,
सीधी। जिले के ग्राम पटेहरा खुर्द के प्रतिष्ठित एवं समाजसेवी व्यक्तित्व प्रभाकर तिवारी उर्फ पप्पू तिवारी के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। उनके असामयिक निधन की खबर से परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों, शुभचिंतकों एवं गांव के लोगों में गहरा दुख छा गया है। उनके अंतिम दर्शन के लिए गांव एवं शहर से लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभाकर तिवारी का जन्म 1 जुलाई 1978 को हुआ था। वे पिछले कुछ समय से ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनका उपचार पहले वाराणसी में शुगर बात जैसी बीमारियों का इलाज चल रहा था। ब्रेन ट्यूमर के बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें भोपाल के चिरायु मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 अक्टूबर 2026 को उनका ऑपरेशन भी किया गया। लेकिन तमाम उपचार प्रयासों के बावजूद 3 नवंबर 2026 को उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
समाजसेवा और मिलनसार स्वभाव के लिए थे पहचाने जाते
प्रभाकर तिवारी उर्फ पप्पू तिवारी केवल अपने परिवार के सदस्य ही नहीं, बल्कि गांव और समाज के लोगों के लिए भी एक सहयोगी एवं आत्मीय व्यक्तित्व थे। वे हमेशा लोगों के सुख-दुख में खड़े रहते थे। जरूरतमंदों की मदद करना, सामाजिक कार्यों में सहभागिता निभाना और लोगों के साथ अपनत्व का व्यवहार करना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान थी ।
उनके निधन से ग्राम पटेहरा खुर्द सहित आसपास के क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। गांव के लोग उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं, जो हर परिस्थिति में लोगों के साथ खड़े रहते थे। उनके जाने से समाज ने एक मिलनसार और सहयोगी व्यक्तित्व खो दिया है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
प्रभाकर तिवारी अपने पीछे पुत्र रामानंद तिवारी को छोड़ गए हैं, जो सीधी के ऊंची हवेली स्थित तिवारी कंप्यूटर के संचालक हैं। परिवार के सदस्यों में उनके भाई सुरेश चंद्र तिवारी, सुरेन्द्र तिवारी (देवा), भास्कर तिवारी (करन) एवं अश्वनी तिवारी शामिल हैं।
वहीं उनके भतीजों में बालकृष्ण तिवारी, अनसूइया तिवारी (भारतीय रेलवे), महेश्वर तिवारी (समाजसेवी), ब्रह्मानंद तिवारी, शिवांशु तिवारी एवं हर्ष तिवारी सहित परिवार के अन्य सदस्य इस कठिन समय में शोकाकुल हैं।
परिजनों के अनुसार उपचार के दौरान भी परिवार के सदस्य लगातार उनके साथ रहे। विशेष रूप से भारतीय रेलवे में सेवाएं दे रहे बालकृष्ण तिवारी,अनसूइया तिवारी अपनी ड्यूटी छोड़कर अपने आदर्श को बचाने हेतु अपने चाचा को लेकर दिनांक 21/10/2026 को भोपाल पहुंचे और उपचार के दौरान परिवार के साथ उपस्थित रहे एवं उनके बड़े भाई बद्री प्रसाद तिवारी स्वयं इलाज हेतु अपने छोटे भाई के साथ उपस्थित रहे।
गांव और शहर के लोगों ने जताया गहरा दुख
प्रभाकर तिवारी के निधन की खबर फैलते ही गांव एवं शहर के लोगों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का उनके परिवार से मिलने और शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए पहुंचना जारी है। हर कोई उनके सरल स्वभाव, सामाजिक व्यवहार और लोगों के प्रति सहयोग की भावना को याद कर रहा है।
उनके निधन से परिवार को हुई अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है। एक ऐसा व्यक्तित्व, जो दूसरों के दुख में सहभागी बनता था, आज स्वयं अपने पीछे अपनों की आंखों में आंसू और दिलों में गहरी यादें छोड़ गया।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
तलाश न्यूज | सीधी
