
कुसमी (सीधी)। तहसील कुसमी क्षेत्र में प्रस्तावित गोड़ परियोजना को लेकर गोतरा, पोंडी, ददरिहा, धुआंडॉल, गुडुआधार, थाड़ीपाथर सहित आसपास के गांवों के किसानों एवं ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण सभा आयोजित कर परियोजना के खिलाफ अपनी आपत्तियां और चिंताएं खुलकर सामने रखीं।
सभा में मौजूद किसानों ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना के दायरे में आने वाली जमीनें उनकी पीढ़ियों की पुश्तैनी भूमि हैं, जिन पर वर्षों से खेती कर वे अपनी आजीविका चला रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की स्थिति में न केवल उनकी खेती प्रभावित होगी, बल्कि कई परिवारों के सामने विस्थापन और पुनर्वास जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी।
ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा— “यह हमारे पूर्वजों की जमीन है, हम इसे बांध के लिए नहीं देंगे। जमीन गई तो हमारा परिवार और आजीविका दोनों प्रभावित होंगे, फिर हम कहां जाएंगे?”
किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के साथ खुला संवाद स्थापित किया जाए। साथ ही परियोजना की विस्तृत जानकारी, संभावित डूब क्षेत्र, प्रभावित भूमि का स्पष्ट विवरण, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया एवं पुनर्वास की व्यवस्था सार्वजनिक रूप से बताई जाए।
सभा में यह भी कहा गया कि किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित परिवारों की राय और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए तथा उचित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों और आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे ‘जमीन बचाओ आंदोलन’ शुरू करने पर मजबूर होंगे। किसानों ने कहा कि वे अपने अधिकार और जमीन की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे।
इस दौरान कई परिवार के मुखिया एकत्रित होकर अपने बीच में बैठ कर अपने अपने सुझाव व्यक्त किए
फिलहाल ग्रामीणों की नजर शासन-प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि परियोजना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक कर पारदर्शी संवाद स्थापित किया जाए, ताकि जमीन, आजीविका और पुनर्वास को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
