मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, सफलता की नई उड़ान का संकल्प,
तलाश न्यूज सीधी
शिक्षा केवल अच्छे अंक हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य को गढ़ने का मजबूत आधार है। विद्यार्थियों के जीवन में पढ़ाई के साथ संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदारी की भावना का होना भी बेहद जरूरी है। आज के विद्यार्थी ही देश के भविष्य के निर्माता हैं। उनके भीतर प्रतिभा और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल इस बात की है कि वे अपनी ऊर्जा को सही दिशा देते हुए लक्ष्य निर्धारित करें और उसे हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प, जुनून तथा निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ें।
उक्त विचार प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मड़रिया में आयोजित मेधावी छात्र अलंकरण समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुष्पराज सिंह परिहार ने की।
सम्मान उपलब्धि का अंत नहीं, नई उड़ान की शुरुआत : दिलीप जायसवाल
प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने प्रदेश एवं जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, गुरुजनों और विद्यालय परिवार के लिए भी गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मिला सम्मान उनकी उपलब्धि का प्रतीक होने के साथ-साथ भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी उपलब्धि को अंतिम मंजिल न मानते हुए इसे नई शुरुआत बनाने तथा जीवन में और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार बेहद जरूरी हैं। शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान देती है, जबकि संस्कार उस ज्ञान का सही दिशा में उपयोग करना सिखाते हैं। विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, संवेदनशीलता, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रभक्ति से बनेगा सशक्त राष्ट्र
दिलीप जायसवाल ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार देना राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। देश का भविष्य जिस युवा पीढ़ी के हाथों में है, उसका शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारित और जिम्मेदार होना भी जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से बचपन से ही राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्य की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का समन्वय ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का आधार है।
गुरु का मार्गदर्शन जीवन को देता है सही दिशा
प्रभारी मंत्री ने गुरु की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि माता-पिता बच्चों को जन्म देकर उनका पालन-पोषण करते हैं, लेकिन गुरु उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने, सही निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता प्रदान करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता के साथ-साथ गुरुजनों का सदैव सम्मान करने का आह्वान किया।
लक्ष्य स्पष्ट होगा तो मेहनत की दिशा भी स्पष्ट होगी
विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। जब लक्ष्य स्पष्ट होता है तो मेहनत की दिशा भी स्पष्ट हो जाती है। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और अनुशासन आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि रास्ते में आने वाली कठिनाइयों और असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। असफलता को अंत नहीं, बल्कि सफलता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मानना चाहिए।
प्रदेश व जिला स्तर के मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
समारोह में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में प्रदेश स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली अनन्या वर्मा तथा नौवां स्थान प्राप्त करने वाली अनन्या विश्वकर्मा सहित सरस्वती विद्यालय परिवार की जिला प्रवीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले कक्षा 10वीं एवं 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
प्रभारी मंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों से कहा कि उनकी उपलब्धि कठिन परिश्रम का परिणाम है, लेकिन इसे अंतिम मंजिल नहीं मानना चाहिए। जीवन में निरंतर सीखते रहना और लगातार आगे बढ़ते रहना ही वास्तविक सफलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति में करने का आह्वान किया।
अनुशासन और संस्कार से ही मिलती है वास्तविक सफलता : पुष्पराज सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पुष्पराज सिंह परिहार ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि अनुशासन, निरंतर परिश्रम और संस्कारों से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित रहते हुए राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।
मेधावी छात्र अलंकरण समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के सम्मान के साथ-साथ उन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, संस्कारों को आत्मसात करने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की प्रेरणा देने वाला अवसर बना।
कार्यक्रम में विजय सिंह परिहार ने स्वागत भाषण दिया। विद्यालय का प्रतिवेदन द्वारिका प्रसाद गुप्ता एवं सुरेंद्र मणि दुबे ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में उपेंद्र सिंह बघेल ने आभार व्यक्त किया।
समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय परिवार, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

