
सीधी। फोरलेन निर्माण की जद में आए मकान और मंदिर के उचित मुआवजे को लेकर ग्राम जमोड़ी सेगरान निवासी राजमणि राम, पिता राम कृष्ण राम ने भू-अर्जन अधिकारी, गोपदबनास के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है। 17 अगस्त 2026 को दिए गए आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थल निरीक्षण और माप के बाद भी उनके मकान एवं मंदिर का मुआवजा अब तक तैयार नहीं किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आवेदन के अनुसार आवेदक की भूमि खसरा नंबर 113/1/2/4/1, कुल रकबा 0.3784 हेक्टेयर (0.0104), NH-39 से लगी हुई है। इसी भूमि पर उनका मकान करीब 40 वर्षों से निर्मित बताया गया है, जबकि मंदिर भी मौके पर स्थित है।
निरीक्षण हुआ, फोटो भी अपलोड हुई, फिर मुआवजा क्यों अटका?
राजमणि राम ने अपने आवेदन में बताया कि फोरलेन निर्माण के संबंध में एनएचएआई द्वारा गठित टीम ने स्थल का निरीक्षण एवं माप किया था। भू-स्वामी का फोटो भी अपलोड किया गया। इतना ही नहीं, उनके आवेदन के मुताबिक बगल के भू-स्वामियों के मकान एवं भूमि को मुआवजा सूची में प्रकाशित भी किया गया है।
लेकिन सवाल यही है कि जब स्थल निरीक्षण और माप की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा आसपास के प्रभावित भू-स्वामियों को मुआवजा सूची में शामिल किया गया है, तो राजमणि राम के मकान और मंदिर का मुआवजा अब तक क्यों लंबित है?
आवेदक ने मांगा पुनः निरीक्षण और नियमानुसार मुआवजा
शिकायतकर्ता ने भू-अर्जन अधिकारी से मांग की है कि संबंधित स्थल का पुनः निरीक्षण एवं आवश्यक जांच कराई जाए तथा फोरलेन निर्माण से प्रभावित उसके मकान एवं मंदिर का शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिलाया जाए।
यह मामला केवल एक परिवार के मुआवजे का नहीं, बल्कि फोरलेन परियोजना से प्रभावित संपत्तियों के समान और पारदर्शी मूल्यांकन से जुड़ा सवाल भी खड़ा करता है। यदि निरीक्षण के बाद भी किसी प्रभावित परिवार की संपत्ति मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रह गई है, तो जिम्मेदार विभागों को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
अब देखना यह है कि शिकायत के बाद प्रशासन दोबारा स्थल निरीक्षण कर प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिलाता है या आवेदन भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है।
