
सीधी। जिले के भदौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। NSUI ने कॉलेज के भवन, निरीक्षण प्रक्रिया, 120 सीटों की मान्यता, फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्र और संस्थान के संचालन से जुड़े लोगों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
NSUI का आरोप है कि कॉलेज को B.Sc. नर्सिंग की 60 और GNM की 60, कुल 120 सीटों की मान्यता दी गई है, जबकि निरीक्षण के दौरान कॉलेज का भवन पूरी तरह तैयार नहीं था। संगठन ने दावा किया है कि निरीक्षण के समय भवन में निर्माण एवं पुताई का कार्य चल रहा था।
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को कॉलेज में बदलने का आरोप
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि जिस परिसर का निरीक्षण किया गया, वह पहले शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में बनाया गया था और वहां करीब 20 दुकानें थीं।
संगठन का दावा है कि निरीक्षण से पहले दुकानों पर नर्सिंग कॉलेज से संबंधित पोस्टर-बैनर लगाए गए और कुछ ही समय में परिसर को कॉलेज के रूप में प्रस्तुत किया गया। NSUI ने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
दूसरे संस्थान से उपकरण लाने का भी आरोप
NSUI ने यह भी आरोप लगाया है कि निरीक्षण के दौरान आवश्यक उपकरण और अन्य संसाधन किसी दूसरे संस्थान से लाकर परिसर में रखे गए थे।
संगठन ने मांग की है कि निरीक्षण के दिन कॉलेज में उपलब्ध लैब, उपकरण, फर्नीचर और अन्य संसाधनों का रिकॉर्ड जांचा जाए। साथ ही यह भी सत्यापित किया जाए कि निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत किए गए संसाधन वास्तव में इसी संस्थान के थे या बाहर से लाए गए थे।
फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की मांग
कॉलेज की मान्यता के लिए प्रस्तुत किए गए फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर भी NSUI ने सवाल उठाए हैं। संगठन ने संबंधित अस्पतालों और संस्थानों से इन प्रमाण-पत्रों का सीधे सत्यापन कराने की मांग की है।
NSUI का कहना है कि यदि जांच के दौरान कोई दस्तावेज फर्जी या गलत पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सांसद के बेटे-बहू के जुड़े होने का आरोप
NSUI ने कॉलेज के संचालन एवं प्रबंधन से भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनूप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा सहित अन्य लोगों के जुड़े होने का भी आरोप लगाया है।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि कॉलेज के संचालन में सांसद के बेटे और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका होने का आरोप है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता में इस तरह की अनियमितताएं होती हैं तो इससे विद्यार्थियों के भविष्य और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
NSUI ने कथित अनियमितताओं की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा आवश्यकता पड़ने पर मान्यता निरस्त करने की मांग की है।
सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने आरोपों से किया इनकार
मामले में भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने आरोपों से इनकार किया है। सांसद का कहना है कि यह उनका नर्सिंग कॉलेज नहीं है और उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें चुना है और वे जनता की सेवा कर रहे हैं।
समाजसेवी ने भी कॉलेज की गतिविधियों पर उठाए सवाल
समाजसेवी आनंद सिंह ददुआ ने भी कॉलेज के संचालन को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि निरीक्षण के बाद परिसर में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां दिखाई नहीं दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि फोटो सेशन के लिए कर्मचारियों को बुलाया गया और बाद में परिसर बंद कर दिया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
CBI और मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
NSUI ने इस मामले को लेकर CBI, मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय अधिकारियों से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
संगठन ने कॉलेज के भवन की वास्तविक स्थिति, 120 सीटों की मान्यता, निरीक्षण रिपोर्ट, निरीक्षण के दौरान उपलब्ध संसाधन, फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्र, संस्थान के स्वामित्व एवं संचालन तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
NSUI का कहना है कि जांच के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
नोट: कॉलेज की मान्यता, निरीक्षण प्रक्रिया, संसाधनों और दस्तावेजों से संबंधित लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। संबंधित विभाग की जांच या आधिकारिक रिकॉर्ड से ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
यह खबर दैनिक भास्कर के अनुसार पब्लिश किया गया है
