
सीधी। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर रोड पर एक व्यक्ति कथित तौर पर नशे की हालत में खून से लथपथ अवस्था में बेहोश पड़ा रहा। बताया जा रहा है कि उसके नाक और मुंह से खून बह रहा था। घटना के दौरान कलेक्ट्रेट आने-जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी वहां से गुजरते रहे, लेकिन तत्काल मदद के लिए रुकने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मौके पर मौजूद राहगीरों ने व्यक्ति के आसपास घेरा बनाकर उसे संभाला और उसकी स्थिति को देखते हुए 108 एंबुलेंस को सूचना दी। काफी देर तक व्यक्ति सड़क किनारे बेसुध अवस्था में पड़ा रहा, जिससे मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यक्ति की हालत देखकर राहगीरों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए उसकी मदद करने का प्रयास किया। वहीं, कलेक्ट्रेट जैसे प्रमुख प्रशासनिक परिसर के बाहर हुई इस घटना ने जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता और तत्काल सहायता व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सवाल
कलेक्ट्रेट के बाहर घायल व्यक्ति मदद के इंतजार में पड़ा रहा, तो जिम्मेदारों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?
क्या प्रशासनिक परिसर के आसपास आपात स्थिति में तत्काल सहायता की कोई व्यवस्था नहीं है?
