
कुसमी, सीधी
राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत मोतियाबिंद सहित दृष्टि संबंधी रोगों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार, 12 सितंबर 2026 को जनपद पंचायत सभागार कुसमी में स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. सुप्रिया सिंह की उपस्थिति में स्वास्थ्य अमले को मोतियाबिंद सर्वे एवं प्रतिवेदन की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान नेत्र सहायक ने मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को क्षेत्र में किए जाने वाले मोतियाबिंद सर्वे की प्रक्रिया समझाई। इसमें संभावित मरीजों की पहचान, उनकी जानकारी का व्यवस्थित संधारण, पंक्ति सूची (लाइन लिस्ट) तैयार करने तथा निर्धारित समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने संबंधी बिंदुओं की जानकारी दी गई।
“ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने के निर्देश”
बीएमओ डॉ. सुप्रिया सिंह ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सर्वे को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ पूरा करें। दृष्टि संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों तथा मोतियाबिंद के संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनकी जानकारी निर्धारित प्रारूप में दर्ज की जाए।
उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में ऐसे संभावित मरीजों की पहचान पर जोर दिया, जो किसी कारणवश स्वयं स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे मरीजों को चिन्हित कर आवश्यक नेत्र जांच एवं उपचार की सुविधा से जोड़ने के लिए प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए गए।
“समय पर रिपोर्टिंग पर जोर”
बैठक में कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सर्वे के दौरान चिन्हित किए गए संभावित मरीजों की जानकारी में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। पंक्ति सूची को व्यवस्थित रूप से तैयार कर संबंधित स्तर पर समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए, ताकि संभावित मरीजों की जांच और उपचार की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
प्रशिक्षण बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), सेक्टर पर्यवेक्षक, क्षेत्रीय कार्यकर्ता, एमटीएस कुसमी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे। इस दौरान कर्मचारियों की जिम्मेदारियों, सर्वे की प्रक्रिया तथा प्रतिवेदन तैयार करने से संबंधित आवश्यक जानकारी भी साझा की गई।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य क्षेत्र में दृष्टि संबंधी समस्याओं की प्रारंभिक स्तर पर पहचान, संभावित मरीजों को उपचार से जोड़ना और मोतियाबिंद के कारण होने वाली दृष्टि हानि की रोकथाम की दिशा में प्रभावी कार्य करना है।
