सीधी जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी कई समस्याएं अधिकारियों के सामने पहुंचीं। इस दौरान ग्राम पंचायत पोस्ता में अधूरे एवं कथित रूप से कागजों में दर्ज निर्माण कार्यों का मामला सामने आया, वहीं ग्राम अमरवाह में मकान गिरने के बाद भी राहत नहीं मिलने की शिकायत लेकर महिला जनसुनवाई में पहुंची। दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं ने लंबे समय से अधिकारियों के समक्ष समस्या रखने के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप लगाया।
डेढ़ साल से अधूरे कामों की शिकायत, अब तक नहीं मिला समाधान
ग्राम पोस्ता निवासी उमेश विश्वकर्मा ने जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सौम्या आनंद के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर पंचायत क्षेत्र में अधूरे पड़े निर्माण कार्यों की जांच कराने की मांग की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में कई विकास कार्य लंबे समय से अधूरे पड़े हैं। कुछ निर्माण कार्यों को पूरा नहीं किया गया है, जबकि कुछ कार्यों के संबंध में रिकॉर्ड और धरातल की स्थिति में अंतर होने की बात कही गई है। उमेश के मुताबिक, इन मामलों को लेकर वह करीब डेढ़ वर्ष से संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
200 रुपये का स्टांप खरीदने के बाद भी नहीं बनी बात
शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई में अपनी समस्या के साथ एक और गंभीर बात रखी। उमेश के अनुसार, पूर्व में उन्हें 200 रुपये का स्टांप लाने के लिए कहा गया था। उन्होंने स्टांप खरीदकर संबंधित प्रक्रिया पूरी की, लेकिन इसके बावजूद शिकायत का समाधान नहीं हुआ।
उमेश का कहना है कि शिकायत के निराकरण की उम्मीद में प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें दोबारा जनसुनवाई का रुख करना पड़ा। मंगलवार को पुनः आवेदन दिए जाने के बाद जिला पंचायत सीईओ सौम्या आनंद ने मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
मकान गिरा, दो महीने से राहत की आस में रामकली
जनसुनवाई में ग्राम अमरवाह की रामकली भुजवा भी अपनी समस्या लेकर पहुंचीं। रामकली के मुताबिक, उनका मकान करीब दो महीने पहले गिर गया था। मकान गिरने के बाद उन्होंने प्रशासन से राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने की मांग को लेकर कई बार आवेदन दिए, लेकिन अब तक उन्हें मदद नहीं मिल सकी।
रामकली का आरोप है कि उन्होंने अपनी परेशानी कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की कार्रवाई नहीं हुई। लंबे समय से सहायता की उम्मीद लगाए महिला ने मंगलवार को एक बार फिर जनसुनवाई में अपनी समस्या रखी।
अधिकारी के निर्देश के बाद भी समाधान का इंतजार
रामकली के अनुसार, वह मंगलवार को अपनी समस्या लेकर कलेक्टर विकास मिश्रा के पास पहुंचीं। उनके मुताबिक, कलेक्टर ने उन्हें अपर कलेक्टर से संपर्क करने के लिए कहा। इसके बाद उन्होंने अपनी शिकायत आगे रखी।
अब सवाल यह है कि मकान गिरने के दो महीने बाद भी यदि पीड़ित परिवार राहत की प्रतीक्षा कर रहा है तो स्थानीय स्तर पर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
जनसुनवाई बनी उम्मीद का मंच, लेकिन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण चुनौती
इन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों का जमीनी स्तर पर कितनी गंभीरता से परीक्षण और निराकरण किया जा रहा है। एक ओर पंचायत के विकास कार्यों में कथित अनियमितता और अधूरेपन की शिकायत लंबे समय से लंबित होने का दावा है, तो दूसरी ओर प्राकृतिक अथवा अन्य कारण से मकान गिरने के बाद राहत की मांग कर रही महिला को भी बार-बार अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है।
हालांकि, जनसुनवाई में दोनों मामलों को अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अब देखना होगा कि निर्देशों के बाद जांच और राहत की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और शिकायतकर्ताओं को वास्तविक समाधान कब तक मिलता है।
तलाश न्यूज समाचार संपादक विनय कुमार त्रिपाठी सीधी

